जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आयोजित एक जनमत संग्रह में बड़ी संख्या में छात्रों ने कुलपति संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के इस्तीफे के समर्थन में वोट दिया है। यह जनमत संग्रह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की ओर से कराया गया था, जिसके नतीजे बुधवार को छात्र संघ ने जारी किए।
JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जनमत संग्रह में कुल 2409 छात्रों ने मतदान किया। इनमें से 2181 छात्रों (लगभग 90.54 प्रतिशत) ने कुलपति के पद पर बने रहने के खिलाफ वोट दिया। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में छात्रों का मानना है कि कुलपति को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अदिति मिश्रा ने बताया कि 207 छात्रों (करीब 8.59 प्रतिशत) ने कुलपति के पद पर बने रहने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 21 वोट अमान्य पाए गए।
इस मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का भी प्रशासन ने तुरंत जवाब नहीं दिया।
अगले सप्ताह होगी सार्वजनिक सुनवाई
छात्र संघ ने यह भी घोषणा की है कि कुलपति के खिलाफ एक सार्वजनिक सुनवाई (पब्लिक हियरिंग) आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम 16 और 17 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इस सुनवाई में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, वकीलों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जा रहा है।
अदिति मिश्रा ने कहा कि इस सुनवाई में छात्र संघ की ओर से एक चार्जशीट भी पेश की जाएगी, जिसमें कुलपति पर लगाए गए आरोपों का विवरण होगा।
पहले से जारी है विवाद
पिछले कुछ समय से विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संघ के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। फरवरी की शुरुआत से ही परिसर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने JNUSU के चार पदाधिकारियों और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नितीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया था।
यह कार्रवाई 21 नवंबर 2025 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में की गई थी।
विरोध और टकराव की घटनाएं
निलंबन के बाद से छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और निलंबन आदेश को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान परिसर में वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आईं।
इसी बीच कुलपति की कथित जातिगत टिप्पणियों को लेकर भी छात्रों और कुछ शिक्षक संगठनों की ओर से कड़ा विरोध किया गया।
इसी मुद्दे पर हुआ जनमत संग्रह
इन विवादों के बाद छात्र संघ ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों में जनमत संग्रह कराया। इसमें छात्रों से पूछा गया कि क्या कथित जातिगत टिप्पणी और प्रशासनिक विवादों के बीच कुलपति को अपने पद पर बने रहना चाहिए या नहीं।
छात्र संघ का कहना है कि इस जनमत संग्रह से छात्रों की भावना साफ दिखाई देती है। JNUSU के अनुसार बड़ी संख्या में छात्रों ने कुलपति से जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग की है।
छात्र संघ ने अपने बयान में कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी राय दी है और अब शिक्षा मंत्रालय को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।
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