लखनऊ मस्जिद बुलडोजर एक्शन, मस्जिद गिराई गई
Lucknow में गुरुवार तड़के बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला, जब सुबह करीब 4 बजे एक मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया गया।
यह कार्रवाई Allahabad High Court के आदेश के बाद की गई। प्रशासन की टीम एडीएम और एसडीएम की मौजूदगी में मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे के भीतर पूरी संरचना को जमींदोज कर दिया गया।
इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
3 बुलडोजर और भारी पुलिस बल, इलाके में हाई अलर्ट
सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था।
करीब 3 बुलडोजर लगाए गए और पूरे इलाके को पहले ही सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। पीएसी की दो टुकड़ियां और स्थानीय पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी।
कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सन्नाटा छाया रहा, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
लखनऊ मस्जिद बुलडोजर एक्शन: क्या है पूरा मामला
यह मस्जिद बक्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के अस्ती गांव में स्थित थी।
प्रशासन का कहना है कि यह संरचना सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई थी।
हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मस्जिद करीब 60 साल पुरानी थी और यहां लंबे समय से नमाज अदा की जा रही थी।
यही विवाद इस पूरे मामले की जड़ बना हुआ था।
2024 से शुरू हुआ विवाद, कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस मामले की शुरुआत साल 2024 में हुई थी, जब प्रशासन ने तहसीलदार कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
2025 में तहसीलदार कोर्ट ने मस्जिद हटाने और 36 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।
इसके बाद मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को ADM कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली।
आखिरकार मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 25 मार्च 2026 को याचिका खारिज कर दी गई और कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
नोटिस के बाद भी नहीं हटाई गई संरचना
अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद की दीवार पर नोटिस चस्पा किया गया था।
प्रशासन ने समय सीमा दी थी कि खुद ही अवैध कब्जा हटा लिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया।
प्रशासन का बयान
एडीएम प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
स्थानीय लोगों का दावा
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद कई दशकों पुरानी थी और वहां केवल इबादत होती थी।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं मिला।
इसको लेकर इलाके में हल्का तनाव बना हुआ है।
कानून क्या कहता है
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यूपी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हटाना जरूरी है।
इस धारा के तहत प्रशासन को अधिकार है कि वह नोटिस देकर अवैध निर्माण को हटाए और जुर्माना भी वसूल करे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्रवाई के दौरान और उसके बाद भी पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पुलिस लगातार गश्त कर रही है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि कोई विवाद न बढ़े।
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