राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विश्वविद्यालय सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की प्रमाणित प्रतियां देने के लिए अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस नहीं लगा सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ₹1000 प्रति आवेदन प्रोसेसिंग शुल्क लेना RTI कानून और उससे जुड़े नियमों के खिलाफ है।
यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने दिया। डिवीजन बेंच में जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह शामिल थे।
अदालत ने यह आदेश D.B. Civil Writ Petition No. 13783/2021 – Vipika vs Rajasthan University of Health Sciences & Anr. मामले में 6 मार्च 2026 को सुनाया।
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब कोई जानकारी RTI Act 2005 के तहत मांगी जाती है तो उसकी फीस वही होगी जो RTI नियमों में तय की गई है।
कोर्ट ने कहा कि कोई भी सार्वजनिक संस्था या विश्वविद्यालय RTI नियमों से अलग जाकर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकता।
अदालत के अनुसार यदि कोई संस्थान अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस लेता है तो यह RTI कानून के ढांचे के खिलाफ माना जाएगा।
मामला क्या था
यह मामला राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) से जुड़ा हुआ है।
याचिकाकर्ता विपिका नाम की छात्रा थीं, जो B.Sc. Nursing की छात्रा थीं। अंतिम वर्ष की परीक्षा में वे दो विषयों में फेल हो गई थीं।
इसके बाद उन्होंने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रमाणित कॉपी प्राप्त करने के लिए RTI Act के तहत आवेदन किया था।
यूनिवर्सिटी ने मांगी थी ₹1225 फीस
याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने RTI आवेदन के साथ निर्धारित ₹10 आवेदन शुल्क जमा कर दिया था।
लेकिन RUHS ने उत्तर पुस्तिका की कॉपी देने के लिए कुल ₹1225 प्रति उत्तर पुस्तिका शुल्क मांगा। इसमें शामिल था:
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₹1000 – प्रोसेसिंग फीस
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₹80 – फोटोकॉपी चार्ज (₹2 प्रति पेज × 40 पेज)
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₹145 – डाक खर्च
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि ₹1000 प्रोसेसिंग फीस पूरी तरह अवैध है, क्योंकि RTI नियमों में ऐसा कोई शुल्क निर्धारित नहीं है।
RTI नियम क्या कहते हैं
Right to Information (Regulation of Fee and Cost) Rules के अनुसार:
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RTI आवेदन शुल्क – ₹10
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दस्तावेज की कॉपी – ₹2 प्रति पेज
इसके अलावा किसी भी प्रकार का अतिरिक्त प्रोसेसिंग शुल्क निर्धारित नहीं है।
याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर अदालत से RUHS के इस शुल्क को रद्द करने की मांग की थी।
यूनिवर्सिटी ने क्या दलील दी
राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने कोर्ट में कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखना और उन्हें निकालकर उपलब्ध कराना एक बड़ा प्रशासनिक काम है।
यूनिवर्सिटी ने बताया कि उनके पास लगभग 6.5 लाख उत्तर पुस्तिकाएं संग्रहित रहती हैं और उन्हें संभालने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत होती है।
इसी कारण यूनिवर्सिटी के Board of Management ने ₹1000 प्रोसेसिंग फीस तय की थी।
कोर्ट ने दलील को किया खारिज
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि RTI Act एक केंद्रीय कानून है और इसके नियमों में फीस का पूरा ढांचा पहले से निर्धारित है।
कोर्ट ने कहा कि कोई भी सार्वजनिक संस्था अपने नियम बनाकर RTI Act के प्रावधानों को बदल नहीं सकती।
RTI Act को मिला प्राथमिकता का दर्जा
अदालत ने अपने फैसले में RTI Act की धारा 22 का भी उल्लेख किया।
धारा 22 के अनुसार RTI Act को अन्य सभी कानूनों और नियमों पर प्राथमिकता प्राप्त है।
इसका मतलब यह है कि विश्वविद्यालय के नियम या गाइडलाइन RTI Act से ऊपर नहीं हो सकते।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया।
इनमें शामिल हैं:
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Institute of Chartered Accountants of India vs Shaunak H. Satya (2011)
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CBSE vs Aditya Bandopadhyay (2011)
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Institute of Company Secretaries of India vs Paras Jain (2019)
इन सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि परीक्षार्थियों को अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं को देखने का अधिकार है।
पहले भी दिया जा चुका है ऐसा फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसले Alka Matoria vs Maharaja Ganga Singh University का भी हवाला दिया।
उस मामले में भी अदालत ने उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देने के लिए लगाए गए अतिरिक्त प्रोसेसिंग शुल्क को अवैध घोषित किया था।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया
अदालत ने RUHS द्वारा जारी की गई 6 सितंबर 2012 की गाइडलाइन और 20 दिसंबर 2014 के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के फैसले को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि RTI के तहत जानकारी देते समय विश्वविद्यालय केवल वही फीस ले सकता है जो RTI नियमों में निर्धारित है।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला
यह फैसला छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई विश्वविद्यालय उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देने के लिए भारी प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं, जिससे छात्रों के लिए जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से अब छात्रों को RTI के माध्यम से कम शुल्क में अपनी उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा।
Case Details
Case Title:
Vipika vs Rajasthan University of Health Sciences & Anr.
Case Number:
D.B. Civil Writ Petition No. 13783/2021
Court:
High Court of Judicature for Rajasthan, Bench at Jodhpur
Bench:
Justice Dr. Pushpendra Singh Bhati
Justice Sandeep Shah
Date of Order:
6 March 2026
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